Sunday, 5 December 2010

शब्द

शब्द के पीछे बहुत से शब्द,
शक्ति असीम शब्द एक एक की !
खूबसूरती को खूबसूरत बनाते शब्द,
वक्त को बदलने की ताकत रखते शब्द !

उद्विग्न मन शीतल करते शब्द,
कुंठाओं को व्यक्त करते शब्द !
शब्द छुपाते ग़म को खुशी में
जीवन की बगिया मह्काते शब्द !

मह्काते शब्द सूने आंगन को,
शब्द देते अकेले मन को संग !
जीवन को मायने देते शब्द,
हंसते हंसाते, रोते रुलाते शब्द !

ज़माने मे क्रांति लाते शब्द,
शब्द बदलते दशा समाज की !
गुलामी को भगाते शब्द,
स्वछन्दता में विचरण कराते शब्द !
एक शब्द फिर मायने इस तरह,
कि शब्दों के पीछे बहुत से शब्द !

पर शब्दों की है संस्कृति अपनी,
जिसमें फलते फूलते शब्द !
रुठ जाते, सूख जाते हैं शब्द,
मिले न अगर इन्हें जगह अपनी !
शब्द हो जाते हैं निरर्थक,
गंवाते है जब इन्हें व्यर्थ !

27 comments:

  1. पर शब्दों की है संस्कृति अपनी,
    जिसमें फलते फूलते शब्द !
    रुठ जाते, सूख जाते हैं शब्द,
    मिले न अगर इन्हें जगह अपनी !

    prabhavi panktiyan.badhai.

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  2. शब्द सब कुछ कहते हैं ..इनकी अपनी भाषा और अपनी संस्कृति होती है ..बहुत अच्छी रचना ...

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  3. रचना तो सुन्दर है ही, आपके प्रयास उससे भी अधिक सराहनीय हैं।

    आशा है आप इसी प्रकार लगातार अपने प्रयासों को जारी रखेंगे।

    शुभकामनाओं सहित।

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश

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  4. बाली जी......बहुत सुन्दर ये शब्द ना हो तो कुछ भी नहीं ............

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  5. bhut sundar shbdon ka gathan kiya hai.......

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  6. शब्दों की अपरम्पार महिमा दर्शाती खुबसूरत कविता...

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  7. 'shabd' se hi shrishti hai..
    shabd hi bramh hai..
    sunder rachna!

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  8. पर शब्दों की है संस्कृति अपनी,
    जिसमें फलते फूलते शब्द !
    रुठ जाते, सूख जाते हैं शब्द,
    मिले न अगर इन्हें जगह अपनी !
    शब्द हो जाते हैं निरर्थक,
    गंवाते है जब इन्हें व्यर्थ !
    शब्दों पर सुन्दर शब्द संयोजन। बधाई बाली जी।

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  9. आपने तो बहुत सुन्दर लिखा..बधाई.
    'पाखी की दुनिया' में भी आपका स्वागत है.

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  10. सुन्दर शब्द खुबसूरत कविता

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  11. पर शब्दों की है संस्कृति अपनी,
    जिसमें फलते फूलते शब्द !
    रुठ जाते, सूख जाते हैं शब्द,
    मिले न अगर इन्हें जगह अपनी

    सच शब्दों की दुनिया कमाल है..... बेहतरीन प्रस्तुति.....

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  12. पर शब्दों की है संस्कृति अपनी,
    जिसमें फलते फूलते शब्द !
    रुठ जाते, सूख जाते हैं शब्द,
    मिले न अगर इन्हें जगह अपनी !
    शब्द हो जाते हैं निरर्थक,
    गंवाते है जब इन्हें व्यर्थ !
    xxxxxxxxxxxxxxxxxxx
    ...कविया की यह पंक्तियाँ सरता सन्देश देती हैं
    मेरे ब्लॉग पर आने .. और टिप्पणी के लिए आपका शुक्रिया ...

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  13. rightly said,your work is worth appreciating.
    I also wrote "sab khem shabdon kaa"

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  14. जगदीश बाली जी
    नमस्कार !
    शब्द की महिमा में अच्छी कविता लिखी है , बधाई !

    शब्दों की है संस्कृति अपनी,
    जिसमें फलते फूलते शब्द !


    बहुत सुंदर !

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  15. शब्दों पर आपने एक अच्छी और सार्थक कविता लिखी.
    इसके लिए आपको आभार.

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  16. बहुत ही अच्छे शब्दों में शब्दों को बयां किया है आपने.

    सादर

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  17. शब्दों पर एक अच्छी और सार्थक कविता
    आभार.
    जगदीश बाली जी नमस्कार ,आपका ब्लॉग और रचनाएँ किसी तारीफ़ का मोहताज नहीं है अत : आप किसी से फोलो करने का आग्रह मत कीजिये फोलोअर अपने आप आजायेंगे यह मेरी व्यक्तिगत सलाह है |

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  18. पर शब्दों की है संस्कृति अपनी,
    जिसमें फलते फूलते शब्द !
    ... bahut khoob ... shaandaar rachanaa !!!

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  19. पर शब्दों की है संस्कृति अपनी,
    जिसमें फलते फूलते शब्द !
    रुठ जाते, सूख जाते हैं शब्द,
    मिले न अगर इन्हें जगह अपनी !
    शब्द हो जाते हैं निरर्थक,
    गंवाते है जब इन्हें व्यर्थ

    वाकई शब्दों और विचारों का सुंदर संयोजन

    http://veenakesur.blogspot.com/

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  20. मिले न अगर इन्हें जगह अपनी !
    शब्द हो जाते हैं निरर्थक,
    गंवाते है जब इन्हें व्यर्थ ! //
    a true definition of words//
    http://babanpandey.blogspot.com

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  21. बहुत अहम होते हैं शब्द ..पूरी कायनात को बदलने की ताक़त लिए.
    बहुत सुन्दर रचना .
    मेरे ब्लॉग पर पधारने का बहुत बहुत शुक्रिया आपका.

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